Monday, October 16, 2017

दिवापली पर कविता

आप सभी को मेरी और मेरे परिवार की और से इस पंच महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं ।
ये पँचउत्सव धनतेरस,रूप चौदस,दिवापली,गोर्धनपूजा और भाईदूज हमारे जीवन मे अनेकानेक खुशियों की दौलत भर जाए।
हम सब के घर में माँ लक्ष्मी का निवास हो ।सुख शांति और भाई चारे के ये त्योहार अपार खुशिया दे जाए।
दीपावली का पावन पर्व हम सब के जीवन में अंधकार को मिटा के रौशनी भर दे ।
आओ मिल कर खुशियों का ये त्यौहार मनायें
हर  घर  मे  हम  भी  रौशनी  का दीया जलायें।

ये  दीप  शिखा  हर आँगन में झिलमिलाती रहें
खुशियों  की  ये सौगात  हर घर तक आती रहें।

ये   पर्व  भाईचारे   का  पैगाम   दे   जाए,
खुश्बू वाली आज सुबह और शाम दे जाए।

मिटा  नफरत आपस मे प्रेम को गले लगायें
भूला कर सारे गम को अपनो को अपनायें।

हर आँगन  में  भाईचारे  की  खुशहाली  हो
प्रेम , शांति, सुकून  वाली  ये वह दीवाली हो।

Saturday, October 14, 2017

कितना प्यार है तुम से

कितना प्यार है तुम से,,,,,,,,,,,,!

तुम शब्दों का श्रृंगार हो
तुम फूलो का हार हो
मेरे आँगन को महका दे
वो तुम ही गुलजार हो।
मेरी हर सुबह और शाम हो
मेरी जुबान पर बसी वो नाम हो।
तुम से ही आज कल में चल रहा हूँ
तुम्हारी सासों में ही पल रहा हूँ।
दिन भी तुम से होता है रात तुम हो
ख्वाब में जो आये हो बात तुम हो।
तुम बहती नदी की निर्मल धार हो
तुम ही मेरा अब सच्चा प्यार हो।
तुम दूर हो फिर भी तुम्हारा आभास है
मेरे दिल की गलियों में तुम्हारा ही निवास है।
मेरे जीने के लिए मेरी जान हो तुम
मेरी हर गम में मुस्कान हो तुम ।
तुम्हे ख़्वाबो में मैं सजाता रहूँगा
हर दिन तुम्हें मैं बुलाता रहूँगा।
में तेरा श्याम तुम मेरी राधा रानी हो
जिंदगी के सफर की मेरी कहानी हो।
तुम से कितना प्यार है इन शब्दों में अहसास नही
अभी प्यार अधूरा है क्यों कि तुम मेरे पास नही ।
जिस दिन तुम मेरे पास होगी
उस दिन सच्चे प्यार का तुमको अहसास होगा।
बस मेरे लब्जों में तुम बया नही हो सकती हो
तुम अब किसी और के ख्यालो में नही खो सकती हो ।
तुम्हारे बिना अब में भी अधूरा हूँ
नही तुम्हारे बिना में पूरा हूँ।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।

Saturday, October 7, 2017

में अपने काम से काम करता हूँ

में अपने काम से अपना काम करता हूँ ।

बड़ो की चरणों मे आज प्रणाम करता हूँ।

जिनके आशीर्वाद से ये दौलत जो मिली,

में अपनी  जिंदगी  उनके नाम करता हूँ।

मोहित

Monday, September 18, 2017

प्रेम पत्र

प्यार का ये पवित्र दिन मुबारक हो।
आज हमारी दोस्ती की 10वी सालगिरा है।
इसकी में अपने तह दिल से आपको बधाई देता हूँ।

आपका और मेरा साथ मानवीय वेदना और सवेदना से पूर्ण रहा है।आज ही के दिन आपने मुझे 2007 में पहला प्रेम पत्र दे कर अपने प्यार का इज़हार किया था।हमारा एक दूजे का रिश्ता किस तरह बना था और किस तरह गुजरा है ये आप बेखूबी से जानते हो।
जब तक मेने आप से प्रेम किया तो प्रेम को पूरी मर्यादा से किया था ।प्रेम क्या होता है ये मेने आपसे सीखा था और मैने अपने प्रेम को और के सामने प्रस्तुत किया है।
स्कुल की जिंदगी से शुरू हो कर हम अपनी निजी जिंदगी में आये तो हम धीरे धीरे एक दूजे से दूर होते चले गये।हमारी दोस्ती मोहब्बत में बदली और आज मोहब्बत फिर से दोस्ती में बदल गई है।आज आप अपनी निजी जिंदगी में खुश हो तो में अपनी जिंदगी में खुश हूँ।
आज में आपके सामने भी अपनी बात रख रहा हूँ ।कहि दिनों से में आपसे बहस कर रहा था कि आप मेरी प्रेमिका हो।लेकिन आप माने नही थे ।तो आज में भी आपके सामने हार मान रहा हूँ।आज के बाद में भी आपसे प्यार नही करुगा।आपका पति ही आपके सच्चे प्रेम का हकदार है।और वो ही आपका सच्चा प्रेमी रहेगा इस जन्म में तो क्या अगले सात जन्मों तक वो ही रहेगा।जब तक मेने आपसे प्रेम किया तब कभी भी मेने प्रेम में आपको कुछ कह दिया हो तो मुझे माफ़ कर देना।मेने अपने प्रेम की विवेचना नही की है।मेने कहि बार अपने शब्दों की मर्यादा का उलंग्न किया है में उसके लिए भी आप से माफ़ी मांगता हूं।
में आपका शुक्र गुजार रहूगा की आप शादी के बाद भी मुझे समय समय पर आप याद करते रहे हो ।और अपने निजी जीवन का परिचय भी आप मुझे देती रही हो।हम एक दूसरे को अपनी व्यतिगत जानकारी भी साझा करते रहें है।सच में आपने एक दोस्त का फर्ज बेखूबी से निभाया था।
दूसरी और में आपको परेशान करता रहा हूँ की आप कोल क्यों नही करती हो।में जानता हूँ की एक नारी पर परिवार में क्या क्या गुजरती है फिर भी में इस से अनजान बना रहा हूँ।
जब तक हमने प्रेम किया था तब तक हमने दुनिया से हट कर प्रेम किया ।मेरा आप से प्रेम में कोई भी स्वार्थ नही था।एक पल कभी हम साथ भी रहे थे  पर उस पल हमने अपनी मर्यादा का उलंग्न नही किया था।मेरा एक ही सपना था कि मेरा अधिकार सिर्फ मेरी जीवन संगनी को मिलेगा।उस पर में खरा रहा था।और आपने भी अपनी मर्यादा का पालन किया था।
कभी कभी में बहुत भावकु हो जाता हूँ।आंसू तक आ जाते है।सोचता हूं शायद आप से प्रेम न होता तो अच्छा रहता।क्योंकि की जिस दिन से प्रेम किया उस दिन से मुझे पता था कि में आपको कभी भी पा नही सकता हूँ।फिर भी में आपसे अनजान रहा हूँ।बेफिक्र बेइम्तिहान मोहब्बत करता रहा हूँ।लेकिन मेरी कभी आप से आस नही टूटी थी।लेकिन में आज आपसे मेरी सारी आशाएं तोड़ रहा हूँ।
क्योंकि मोहब्बत का रास्ता छोड़ रहा हूँ।आप खुद जानते हो आप ने मुझे बहुत रुलाया है।आप के विरह प्रेम की व्यर्था में किसी को नही सुना पाया हूँ।हमेशा ये ही कहता रहा हूँ की सुमन मेरे से बहुत प्यार करती है।
में आपका प्यार कभी भूल तो नही पाहुगा।ये प्रेम हमेशा मुझे मेरी कविता,शायरी मेरी गजल में याद आता रहेंगा।
लेकिन आज ये फैशला लेने में मुझे ख़ुशी और गम दोनु है।
अगर मेने कभी आपके निजी जीवन में दखल दी हो तो मुझे आज माफ़ कर देना।
बस मेरे मन में एक इच्छा थी वो कभी पूरी नही हो सकी।
उसका गम तो मुझे हमेशा रहेगा।
अब मुझे भी मेरे जीवन साथी की तलाश है जो सच में प्रेम की बरसात कर सके।सच्चा प्यार मुझे अब वो ही दे सकेगा।
आज से में अब कभी भी आपकी जिंदगी में कभी बाधा नही बनुगा  ।बेवक्त अब कभी याद मत करना।अब में कुछ नही लिख पा रहा हूँ।मेरी आँखों में असू धार आ गई।
अगर मेरे ये शब्द आपके दिल के दरवाजे तक पूछे हो तो आप भी अपनी भावना व्यक्त कर सकते हो।आज से में आपको छोड़ रहा हूँ।

ना डालो बोझ दिलों पर अक्सर दिल टूट जातें हैं
सिरे नाजुक हैं दोस्ती के जो अक्सर छूट जातें हैं
ना रखो दोस्ती की बबुनियादों में कोई झूठ का पत्थर
लहर जब तेज आती है तो घरौंदे भी टूट जातें हैं

आज पास नही वो दूर है
मिल नही सकते वो मजबूर है
दिल के आईने में देखो
तो उनके प्यार जरूर है।।

हम ये दोस्ती हमेशा निभाएंगे।
दूर भी है फिर भी नही भुलायेंगे

Sunday, September 17, 2017

जन्म दिन पर

सुख शांति वैभव मिलें, जितनी ईश्वर के पास है 27
दौलत, संपदा  मिलें, जितनी  सागर  के पास है।
सारी  ईच्छा पूरी  होगी  इतना  विश्वास  है
जन्म दिन दे इतनी ऊँचाई जितना आकाश है।
मोहित जागेटिया

Saturday, September 16, 2017

मगर मेरे हाथ मे तो बस तिरंगा है

जिधर में देखता हूँ उधर आज कल दंगा है।
भारत   मे   बहती   निर्मल  पावन  गंगा  है
इस भूमि को कोई अपना माने या ना माने,
मगर  मेरे  हाथ  में  तो  बस  एक  तिरंगा है।
मोहित

Monday, September 4, 2017

राधा भी दीवानी

बस  मेरे  जीवन  की  एक  कहानी  है।
आँखों  से  उतरता  कभी  वो  पानी  है।
जिसकी चाहत में खुद को तो मिटा दिया
उस  मोहन  की  राधा  भी  दीवानी  है।
मोहित