Thursday, December 7, 2017

राम होंगे मंदिर में विराजमान

राम की महिमा जिसने भी गाई वो इस भव से तर गया
रावण  जैसा  महाज्ञानी  भी  राम  के  हाथ से मर गया।

राम नाम को कोई इस जग में अब तक हरा नही पाया
सबको हर मुसीबत में बस राम नाम ही तो याद आया।

अंत समय  राम  नाम  साथ  जाएगा वो ही स्वीकार है
राम  मान  सत्य  है  राम  नाम  की महिमा अपरंपार है ।

इस दुनिया  में  जिसने हम को मर्यादा का पाठ पड़ाया
भरत ,लखन जैसा भाई भाई का प्यार हमको सिखाया ।

अयोध्या  करती  है पुकार  बने राम का मंदिर इस बार
चढ़े ध्वजा , हो पूजा आरती , चढ़े फूल माला का हार ।

आज  नही  तो  कल होगा जैसा सोचा वैसा हल होगा
अब  राम होंगे मंदिर में विराजमान  वो अब पल होगा।

मोहित

Monday, December 4, 2017

तुम ही मेरी जिंदगी तुम ही मेरा प्यार हो

तुम ही मेरी जिंदगी तुम ही मेरा प्यार हो ।
तुम से बना हूँ में , तुम ही मेरा संसार हो।
तुम्हारे  लिए  सपनें  मेरे  कही  हजार है,
उन सपनों में तुम मेरे लिए कही हजार हो।

में यहाँ बहता पानी हूँ जिसकी तुम धार हो।
इस बीच नदी की तुम आज मेरी पतवार हो।
तुम्हारी  दोस्ती  ही  मेरा  सच्चा  जीवन  है,
तुम जैसे हो, वैसे ही मुझे ,अब स्वीकार हो ।
मोहित

तुम्हारा ही अहसास लिखूंगा

मिलों तुम तो तुम्हारा ही अहसास लिखूंगा ।
बिन  देखे तुम्हें में खुद को उदास लिखूंगा ।
तुम्हें  देख  कर  ही  में ये जीवन जी पाया,
कभी दूर चले जाहो दिल के पास लिखूंगा ।
मोहित

Thursday, November 23, 2017

में हर दिन याद करूँगा

में  तुम्हारी  हर याद को नमन करता हूँ।
गुज़रे हुए कल को आज वंदन करता हूँ।
में आस्था,श्रद्धा और सुमन के फूल आज
में  तुम्हारी  चरणों  में  अर्पण  करता हूँ।
मोहित

में  गुजरें  हुए  कल  की याद करता हूँ ।
कल की याद में अब फरियाद करता हूँ।
हर दिन गुजरा हुआ पल याद आता है,
बीती  याद  से  आज  सवांद  करता हूँ।
मोहित

पद्मावती

हमारी  संस्क्रति  को  यूँ  नही  आज  बदनाम होने देंगे ।
हम  पद्मावती  की  अस्मत  को  नही नीलाम होने देंगे ।
हम भी भूगोल बदल देंगे अगर अब इतिहास बदला तो
मगर  झूठे  इतिहास  का  आज  नही  बखान  होने देंगे ।।
मोहित

मुक्तक मानुषी


भारत   की   बेटिया  संसार   में   मान   बड़ाती   है ।
हर  प्रतियोगिता   में   भाग   लेने  वो  जो  जाती  है।
जग  की  सारी सुंदरियों  को  पछाड़  कर भारत की ,
मानुषी छिल्लर मिस वर्ल्ड का ख़िताब जीत आती है।

गजल


ना जानें किस आग में वो जल रही थी
मोहब्बत  के सफर में वो चल रही थी ।
कोई  नही  था  उसको  पालने  वाला
जानें किस के दम पर आज पल रही थी।
वो अपनी मंजिल की और बड़ रही थी,
लोंगो को ये बात भी क्यों खल रही थी।
आदि नही ,अनादि रौशनी की किरण थी
आज अपने सफर की और डल रही थी।
जग के सामने कभी झुकने नही दिया
और को मजबूत किया खुद गल रही थी।।
मोहित

Friday, November 17, 2017

पद्मावती

            पद्मावती
तुम याद करों राजस्थान का इतिहास
महाराणा  ने  रखा  यहाँ  पर उपहास।
मत भूलों तुम यहाँ की आन,बान शान
रानी  पद्मावती  का  रहा  था जो मान।
झुकने  नही  दिया  हो  गई  सती रानी
पद्मावती  की  रही  ऐसी  वो  कहानी।
वो तो ज्वाला थी जो आग में जल गई
कभी भगवा लहरा कर वो अब चल गई।
उसकी आन बान को तुम मिटाने चले
नया इतिहास ही तुम अब बनाने चले।
हम संस्क्रति   नही  बदनाम  होने देंगे
झूठा इतिहास  नही  बखान  होने देंगे।
मोहित

Tuesday, November 7, 2017

सन्तों की चरणों में स्थान मिलें

जब कल्पना को हकिगत की उड़ान मिलें ।

खुद  की  नजरों में खुद को पहचान मिलें ।

जिसकी  चरणों  में शांति का अहसास हो,

ऐसे  सन्तों  की  चरणों  में   स्थान  मिलें ।

मोहित

Tuesday, October 31, 2017

हर वक्त तुम से ही मोहब्बत करूँगा

गुरुदेव के जन्म दिन पर

आज मेरे गुरुदेव महंत दीपक पूरी जी का जन्मदिन है .....अभिनन्दन करता हूँ वंदन करता हूँ ...मेरे गुरुदेव का है जन्मदिन सबको सूचित करता हूं ..
दीपक बन के जग में वो आयें ।
रौशनी अपनी साथ वो लायें ।
अँधेरा हट गया हर फ़िजा से,
भगवान बन के आज वो छायें।

जग से हारे का तू साथ निभाता है ।
दीनों दुखियों का तू मान बढाता है।
संसार में भटक गये अपनी राह से,
उनकी अंगुली पकड़ राह दिखाता है।
मोहित
जय जय गुरुदेव

Saturday, October 28, 2017

बेटियों को बचाहियें

प्रकति को बचाना है तो बहती नदियों को बचाहियें ।
सभ्यता  को  बचाना है तो संस्कृतियो को बचाहियें ।
अगर खुद को हमको बचाना है तो सबसे पहले तो,
भूर्ण  हत्या  बन्ध  कर  हमारी बेटियों को बचाहियें।
मोहित

मेरी नजर तुमको देखना चाहती

मेरी नजर तुम्हें हर पल देखना चाहती है।
तेरी खुश्बू से ये आज महकना चाहती है।
अरे तुम भी आज मुझे अपने गलें से लगा दो,
अब साँसे तेरी सासों से मिलना चाहती है ।

मोहित

Friday, October 20, 2017

दिवापली


हर खता भूल कर दुश्मन को गले लगायें ।
प्यार का दीया हम अपने दिल मे जलायें ।
दीप  शिखा  रौशनी  का  ये पावन पर्व है,
आहों मिल कर हम सभी दीवाली मनायें ।
मोहित जागेटिया

दीपावली

आओ मिल कर खुशियों का ये त्यौहार मनायें ।
हर  घर  मे  हम  भी  रौशनी  का दीया जलायें।
ये  दीप  शिखा  हर आँगन में झिलमिलाती रहें,
हम सब के दिलों में  प्यार की ये अलख जगायें।
  मोहित

Monday, October 16, 2017

दिवापली पर कविता

आप सभी को मेरी और मेरे परिवार की और से इस पंच महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं ।
ये पँचउत्सव धनतेरस,रूप चौदस,दिवापली,गोर्धनपूजा और भाईदूज हमारे जीवन मे अनेकानेक खुशियों की दौलत भर जाए।
हम सब के घर में माँ लक्ष्मी का निवास हो ।सुख शांति और भाई चारे के ये त्योहार अपार खुशिया दे जाए।
दीपावली का पावन पर्व हम सब के जीवन में अंधकार को मिटा के रौशनी भर दे ।
आओ मिल कर खुशियों का ये त्यौहार मनायें
हर  घर  मे  हम  भी  रौशनी  का दीया जलायें।

ये  दीप  शिखा  हर आँगन में झिलमिलाती रहें
खुशियों  की  ये सौगात  हर घर तक आती रहें।

ये   पर्व  भाईचारे   का  पैगाम   दे   जाए,
खुश्बू वाली आज सुबह और शाम दे जाए।

मिटा  नफरत आपस मे प्रेम को गले लगायें
भूला कर सारे गम को अपनो को अपनायें।

हर आँगन  में  भाईचारे  की  खुशहाली  हो
प्रेम , शांति, सुकून  वाली  ये वह दीवाली हो।

Saturday, October 14, 2017

कितना प्यार है तुम से

कितना प्यार है तुम से,,,,,,,,,,,,!

तुम शब्दों का श्रृंगार हो
तुम फूलो का हार हो
मेरे आँगन को महका दे
वो तुम ही गुलजार हो।
मेरी हर सुबह और शाम हो
मेरी जुबान पर बसी वो नाम हो।
तुम से ही आज कल में चल रहा हूँ
तुम्हारी सासों में ही पल रहा हूँ।
दिन भी तुम से होता है रात तुम हो
ख्वाब में जो आये हो बात तुम हो।
तुम बहती नदी की निर्मल धार हो
तुम ही मेरा अब सच्चा प्यार हो।
तुम दूर हो फिर भी तुम्हारा आभास है
मेरे दिल की गलियों में तुम्हारा ही निवास है।
मेरे जीने के लिए मेरी जान हो तुम
मेरी हर गम में मुस्कान हो तुम ।
तुम्हे ख़्वाबो में मैं सजाता रहूँगा
हर दिन तुम्हें मैं बुलाता रहूँगा।
में तेरा श्याम तुम मेरी राधा रानी हो
जिंदगी के सफर की मेरी कहानी हो।
तुम से कितना प्यार है इन शब्दों में अहसास नही
अभी प्यार अधूरा है क्यों कि तुम मेरे पास नही ।
जिस दिन तुम मेरे पास होगी
उस दिन सच्चे प्यार का तुमको अहसास होगा।
बस मेरे लब्जों में तुम बया नही हो सकती हो
तुम अब किसी और के ख्यालो में नही खो सकती हो ।
तुम्हारे बिना अब में भी अधूरा हूँ
नही तुम्हारे बिना में पूरा हूँ।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।

Saturday, October 7, 2017

में अपने काम से काम करता हूँ

में अपने काम से अपना काम करता हूँ ।

बड़ो की चरणों मे आज प्रणाम करता हूँ।

जिनके आशीर्वाद से ये दौलत जो मिली,

में अपनी  जिंदगी  उनके नाम करता हूँ।

मोहित

Monday, September 18, 2017

प्रेम पत्र

प्यार का ये पवित्र दिन मुबारक हो।
आज हमारी दोस्ती की 10वी सालगिरा है।
इसकी में अपने तह दिल से आपको बधाई देता हूँ।

आपका और मेरा साथ मानवीय वेदना और सवेदना से पूर्ण रहा है।आज ही के दिन आपने मुझे 2007 में पहला प्रेम पत्र दे कर अपने प्यार का इज़हार किया था।हमारा एक दूजे का रिश्ता किस तरह बना था और किस तरह गुजरा है ये आप बेखूबी से जानते हो।
जब तक मेने आप से प्रेम किया तो प्रेम को पूरी मर्यादा से किया था ।प्रेम क्या होता है ये मेने आपसे सीखा था और मैने अपने प्रेम को और के सामने प्रस्तुत किया है।
स्कुल की जिंदगी से शुरू हो कर हम अपनी निजी जिंदगी में आये तो हम धीरे धीरे एक दूजे से दूर होते चले गये।हमारी दोस्ती मोहब्बत में बदली और आज मोहब्बत फिर से दोस्ती में बदल गई है।आज आप अपनी निजी जिंदगी में खुश हो तो में अपनी जिंदगी में खुश हूँ।
आज में आपके सामने भी अपनी बात रख रहा हूँ ।कहि दिनों से में आपसे बहस कर रहा था कि आप मेरी प्रेमिका हो।लेकिन आप माने नही थे ।तो आज में भी आपके सामने हार मान रहा हूँ।आज के बाद में भी आपसे प्यार नही करुगा।आपका पति ही आपके सच्चे प्रेम का हकदार है।और वो ही आपका सच्चा प्रेमी रहेगा इस जन्म में तो क्या अगले सात जन्मों तक वो ही रहेगा।जब तक मेने आपसे प्रेम किया तब कभी भी मेने प्रेम में आपको कुछ कह दिया हो तो मुझे माफ़ कर देना।मेने अपने प्रेम की विवेचना नही की है।मेने कहि बार अपने शब्दों की मर्यादा का उलंग्न किया है में उसके लिए भी आप से माफ़ी मांगता हूं।
में आपका शुक्र गुजार रहूगा की आप शादी के बाद भी मुझे समय समय पर आप याद करते रहे हो ।और अपने निजी जीवन का परिचय भी आप मुझे देती रही हो।हम एक दूसरे को अपनी व्यतिगत जानकारी भी साझा करते रहें है।सच में आपने एक दोस्त का फर्ज बेखूबी से निभाया था।
दूसरी और में आपको परेशान करता रहा हूँ की आप कोल क्यों नही करती हो।में जानता हूँ की एक नारी पर परिवार में क्या क्या गुजरती है फिर भी में इस से अनजान बना रहा हूँ।
जब तक हमने प्रेम किया था तब तक हमने दुनिया से हट कर प्रेम किया ।मेरा आप से प्रेम में कोई भी स्वार्थ नही था।एक पल कभी हम साथ भी रहे थे  पर उस पल हमने अपनी मर्यादा का उलंग्न नही किया था।मेरा एक ही सपना था कि मेरा अधिकार सिर्फ मेरी जीवन संगनी को मिलेगा।उस पर में खरा रहा था।और आपने भी अपनी मर्यादा का पालन किया था।
कभी कभी में बहुत भावकु हो जाता हूँ।आंसू तक आ जाते है।सोचता हूं शायद आप से प्रेम न होता तो अच्छा रहता।क्योंकि की जिस दिन से प्रेम किया उस दिन से मुझे पता था कि में आपको कभी भी पा नही सकता हूँ।फिर भी में आपसे अनजान रहा हूँ।बेफिक्र बेइम्तिहान मोहब्बत करता रहा हूँ।लेकिन मेरी कभी आप से आस नही टूटी थी।लेकिन में आज आपसे मेरी सारी आशाएं तोड़ रहा हूँ।
क्योंकि मोहब्बत का रास्ता छोड़ रहा हूँ।आप खुद जानते हो आप ने मुझे बहुत रुलाया है।आप के विरह प्रेम की व्यर्था में किसी को नही सुना पाया हूँ।हमेशा ये ही कहता रहा हूँ की सुमन मेरे से बहुत प्यार करती है।
में आपका प्यार कभी भूल तो नही पाहुगा।ये प्रेम हमेशा मुझे मेरी कविता,शायरी मेरी गजल में याद आता रहेंगा।
लेकिन आज ये फैशला लेने में मुझे ख़ुशी और गम दोनु है।
अगर मेने कभी आपके निजी जीवन में दखल दी हो तो मुझे आज माफ़ कर देना।
बस मेरे मन में एक इच्छा थी वो कभी पूरी नही हो सकी।
उसका गम तो मुझे हमेशा रहेगा।
अब मुझे भी मेरे जीवन साथी की तलाश है जो सच में प्रेम की बरसात कर सके।सच्चा प्यार मुझे अब वो ही दे सकेगा।
आज से में अब कभी भी आपकी जिंदगी में कभी बाधा नही बनुगा  ।बेवक्त अब कभी याद मत करना।अब में कुछ नही लिख पा रहा हूँ।मेरी आँखों में असू धार आ गई।
अगर मेरे ये शब्द आपके दिल के दरवाजे तक पूछे हो तो आप भी अपनी भावना व्यक्त कर सकते हो।आज से में आपको छोड़ रहा हूँ।

ना डालो बोझ दिलों पर अक्सर दिल टूट जातें हैं
सिरे नाजुक हैं दोस्ती के जो अक्सर छूट जातें हैं
ना रखो दोस्ती की बबुनियादों में कोई झूठ का पत्थर
लहर जब तेज आती है तो घरौंदे भी टूट जातें हैं

आज पास नही वो दूर है
मिल नही सकते वो मजबूर है
दिल के आईने में देखो
तो उनके प्यार जरूर है।।

हम ये दोस्ती हमेशा निभाएंगे।
दूर भी है फिर भी नही भुलायेंगे

Sunday, September 17, 2017

जन्म दिन पर

सुख शांति वैभव मिलें, जितनी ईश्वर के पास है 27
दौलत, संपदा  मिलें, जितनी  सागर  के पास है।
सारी  ईच्छा पूरी  होगी  इतना  विश्वास  है
जन्म दिन दे इतनी ऊँचाई जितना आकाश है।
मोहित जागेटिया

Saturday, September 16, 2017

मगर मेरे हाथ मे तो बस तिरंगा है

जिधर में देखता हूँ उधर आज कल दंगा है।
भारत   मे   बहती   निर्मल  पावन  गंगा  है
इस भूमि को कोई अपना माने या ना माने,
मगर  मेरे  हाथ  में  तो  बस  एक  तिरंगा है।
मोहित

Monday, September 4, 2017

राधा भी दीवानी

बस  मेरे  जीवन  की  एक  कहानी  है।
आँखों  से  उतरता  कभी  वो  पानी  है।
जिसकी चाहत में खुद को तो मिटा दिया
उस  मोहन  की  राधा  भी  दीवानी  है।
मोहित

शिक्षक दिवस

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं,आज उन सभी शिक्षकों की चरणों में मेरा प्रणाम जिनसे मेने कुछ ना कुछ जरूर सिखा है।

जिसने  मेरी  गलती  को  गलती  बताया  था।
उसने  मुझे  ज्ञान, सत्य  का  पाठ  पढ़ाया था।
उन सभी शिक्षकों की चरणों में आज नमन है,
जिसने  भी  मुझे  सच  में  इंसान  बनाया था ।
मोहित

Saturday, September 2, 2017

भाई कल के दिन नही भूल पाएंगे

तेरे  आंसू  को  अब  कभी  भूल नही पाहूंगा।
तुम से दूर सच में मै अब कभी नही जाहूंगा।
सच में देख लिया है हाल कल मैने तुम्हारा,
भाई कसम से कल के दिन को नही भुलाहूँगा।
मोहित

Thursday, August 24, 2017

जागेटिया परिवार से

हमेशा  बना   रहें  हमारा  अपना  संस्कार।
हर  दिन  आबाद  बना  रहें हमारा परिवार।
मेरे  जीने  की  चाहत  का  ये  ही  अरमान,
जागेटिया परिवार  से मिलता स्नेह अपार ।
मोहित


Monday, August 14, 2017

कान्हा दिल से आज हम बुलाएँगे

तेरा  मंदिर  फूलो  से  आज  सजाएंगे।
मिश्री, माखन ,दही का भोग लगाएंगे ।
हमारे द्वार पर तुम भी आज चले आना ,
कान्हा तुम्हें आज हम दिल से बुलाएँगे।
मोहित

Sunday, August 13, 2017

तिरंगा 15/8/17

हम  आज़ादी  का  ये  त्यौहार  मनायें
एक  दूजे  में  प्यार की अलख जगाए ।
भारत  के  वीरों   को  सम्मान  दिलाए
इस धरती पर हम अपना फर्ज निभाए ।
विश्व   की  धरती  पर  तिरंगा  लहरायें
ऐसा  सुन्दर  भारत  यहाँ  हम  बनायें ।
हम शांति ,अहिंसा के मार्ग पर अब चलें
कलमकार  अपनी  ये  आवाज  उठायें ।
इस  धरती का हम अपना कर्ज चुकायें
भारत  माता  पर  अपना शीश जुखायें ।

ये  आजादी   हमारी   शान  बन  जायें
आजादी   हमारी   मुस्कान  बन  जायें ।
तीन   रंगों   से   बना   हमारा   तिरंगा,
अंत  समय  हमारी  पहचान  बन जायें ।
       मोहित

कृष्ण जन्माष्टमी पर छंद

वो गोकुल का ग्वाला था, वो मोर मुकुट धारी
वो  कृष्ण  बांके बिहारी ,आज  मथुरा  आया ।
मुरली  का दीवाना था, वो माखन को  चुराता
गोपियों    संग   रहता ,  राधा    दिल  चुराया।
पापियों का नाश किया,भक्तो का उद्धार किया
सबका कल्याण किया, वो  हर  जगह  छाया।
गीता  उपदेस  दिया , ज्ञान  का  पाठ  पढ़ाया
जिसने  तो  दुनिया  को,  प्रेम  पाठ  सिखाया।
मोहित







Thursday, August 10, 2017

अंसार के बयान पर

अपनी औकात में और अपने ईमान में रहों ।
बनाई है पहचान तो अपनी पहचान में रहों।
ऊँचाई पर जा कर आज नीछे क्यों गिरते हो तुम,
यहाँ पर सुरक्षित नही तो तुम पाकिस्तान में रहों।
मोहित

Saturday, August 5, 2017

वहाँ चला आहूँगा

जिंदगी के हर मोड़ पर तुम हो तो क्या गम है।
मेरी तुम से दोस्ती नही किसी से अब  कम हैं।
हर  मुसीबत  में  मुझे  तुम तो आवाज लगाना,
वहाँ   चला  आहूँगा  तेरे  आगें   जो   हम   हैं।
    मोहित

ये दोस्त तुम ही मेरी जिंदगी

तुम  ही  मेरी  जिंदगी  हो ,तुम  ही अब मेरा प्यार हो।
तुम  से  बनी  हसीन  दुनिया , तुम  ही मेरा संसार हो।
तुम हो तो मुझे क्या गम है तुम नही तो हर पल कम है,
ये  जिंदगी तो एक  नदी  , जिसकी तुम निर्मल धार हो।
        मोहित

Audio Kavita by MOHIT JAGETIYA

Audio Kavita by MOHIT JAGETIYA

Wednesday, July 26, 2017

यमुना के किनारे

यमुना  के  किनारें  काना  बंशी बजाते थे।
गोकुल  में  तो  मुरली  वाले गाय चराते थे।
अरे नटखट थे नन्द और यशोदा का लाला,
राधे  नाम  की  वो ब्रज  में धूम मचाते  थे।
मोहित जागेटिया

Tuesday, July 25, 2017

अधूरी सी जिंदगी

"अधूरी सी जिंदगी"

पल पल बीत रहा है
पल पल बीत गया
हर पल अधूरा हूँ,
तुम्हारे बिना ये
अधूरी सी जो जिंदगी ।
पल पल टूट रहा हूँ
हर पल सुख रहा हूँ
तुम्हारे बिना में
जीवन जो जी रहा हूँ।
खुद को में तुम मै
सीमेट रहा हूँ ।
खुद को में खुद ही
मिटा रहा हूँ ।
तुम्हारे बिना जो
जीवन मै जी रहा हूँ ।
मोहित

बहिन( रक्षा बंधन)

         ""    बहिन   ""
तुम  सावन  की आज पहली बौछार हो ।
तुम  बहती  नदी  में  निर्मल  सी धार हो ।
तुम  ही इस चमन में खिलता वो फूल हो,
तुम घर आँगन में भाई का कही प्यार हो।
तुम   से  सजा  ये  सुन्दर  वो  संसार  हो
ये घर  तुम  से  बना  वो  तुम परिवार हो।
एक  रेशम   के  धागे   से   बना   रिश्ता,
मेरा  तुम   रक्षा   बंधन  का  त्यौहार  हो।
                  मोहित
    

Thursday, July 20, 2017

मेरी कविता

             मेरी कविता
नही फूलों का हार है शब्दों का श्रृंगार है
शब्द शब्द माँ सरस्वती का ये उपहार है।
हर दिन मोहब्बत मेरी कविता का काम है
यही  मेरा  दुनिया  को  प्रेम  का  पैगाम है।
जग  में  शांति  अहिंसा  का  मेरा ईमान है
मेरी  सत्यता  ही  यहाँ   मेरी   पहचान  है।
गलत करें उसके लिए ये दर्पण बन जाती
अच्छा करें उसके लिए समर्पण बन जाती ।
गलत को गलत बताना यही मेरा काम है
मेरी कविता बस आज प्यार का पैगाम है।
मोहित






हर दिन मेरे ख़्वाबो में तुम आते हो ।मुतक्त

जिंदगी  को   तुम   फूलो  से  बनाते  हो।
हर दिन हर सपना आज तुम सजाते हो ।
खुशबू  फूलो  से  जुदा  नही  हो  पाती,
हर  दिन  मेरे  ख़्वाबो  में  तुम  आते  हो।
मोहित
मेरी  हर  बातों  को कभी भुलाते हो ।
प्यार में बहुत गम मुझे भी सताते हो।
आँखों  ही  आँखों  में अपना हो जाते,
हर  सपना  पूरा  हो  तुम  वो  रातें हो ।
मोहित

Tuesday, July 11, 2017

मुक्तक अमरनाथ हमले पर

शिव तेरे भक्त तो ,तेरी  चरणों में सो रहें है ।
भक्त तुम्हारे दरबार में ,तुम  कहाँ खो रहें है।
हे भोले  तुम्हारे  होते  भारत  पर  क्यों ऐसे,
हमेशा  ही ये आतंकवादी  हमले  हो  रहें है।
मोहित

अमरनाथ हमले पर

   "अमरनाथ हमले पर मेरी कविता"

मोदी जी अब हम किस पर आस लगायें
हमले तो हो रहें किस पर विश्वास लगायें ।
कब   तक   हमले   यहाँ   पर   होते   रहेंगे
कब   तक   हम   इंसान   को  खोते   रहेंगे।
तुम  को  तो अब  शिव रूप बनाना होगा
विक्राल  रूप   देश   को  दिखाना  होगा ।
तांडव  कर  अब  भूचाल   मचाना   होगा
शिव  नाम  ले  कर  आतंक  मिटाना होगा।
बहुत   हो   गया  अब  तो  यहाँ  अत्याचार
या   कमजोर   हो   रही   हमारी   सरकार।
अमर  बर्फानी   को   भक्तों  से  प्यार   था
सावन   का   ये   पहला  ही  सोमवार  था।
दुश्मन  तो   अपनी   घात   लगा   बेटा  था
शिव  भक्त  तो  आज   चरणों  में  लेटा  था ।
शिव  नाम  का  वह  दुश्मन  ऐसा  कौन था
दुश्मन   के   सामने   मेरा   शिव   मौन   था।
शिव   तेरा  भक्त   रात   दिन  जाग  रहा  था
आ  कर  सलामत  की   दुआ  मांग  रहा  था।
दुश्मन  की  दुआ  तुमने  आज  सुन  ली थी
भक्त  ने  तो   जगह  चरणों  में  चुन  ली  थी।
सब  की  दुआ  सुनलो  दुश्मन  को  मिटा  दो
घाटी   में  शांति  ला   कर , अशांति   हटा  दो।
तुम  हम  सब  को  खुशियों  की  दौलत  दे दो
हम  सब   को   सलामत   की   शौहरत  दे  दो ।
मोहित

Friday, July 7, 2017

हम भी आशियाना बनाने चलें है

हम   भी  अपना  आशियाना  बनाने  चलें  है।

रात के सपनों को अब हकिगत सजाने चलें है।

जो  छोड़  चूके  हमारा  साथ  इस  दुनिया  से,

उनको  छोड़  हम  भी  दुनिया  बसाने  चले  है।
मोहित

रूठना दोस्त से

ये दोस्त हमनें तो तुमको उठाना चाहा
मगर तुमनें खुद को खुद से गिराना चाहा।
हमनें तुमको अपना मान दोस्ती निभाई
तुमनें तो हमसे हर बात भी जब छुपाई।
खुद को गिरा कर तुम अब उठ नही पाहोगें
मंजिल से भटक नही रास्तों पर आहोगें।
हकिगत में अब तो हम भी तुमको जान गये
तुम्हारी हर हरकत को अब पहचान गये ।
मैं तुम्हारी हर हरकत का जुवाब दूँगा
में मेरी दोस्ती का भी अब हिसाब दूँगा।
अब नही तुम्हें कुछ कहने का अधिकार है
तुम्हें तो अब किसी और से जो प्यार है।
मोहित

गुरु देव पर मुक्तक

में अपनी हर ख़ुशी को उनको पैगाम करता  हूँ ।
इस जिंदगी की दौलत को उनके नाम करता हूँ।
यहाँ जो भी मिला है  उनके आशीर्वाद से मिला,
गुरु  पूजा कर के गुरु चरणों में प्रणाम करता हूँ।
मोहित

आँखों से उस दोस्त को बदलते देखा है

मैने  बुझते  चिराग  को  जलते  देखा  है।
कभी उस आंगन में फूल खिलते देखा है ।
कभी जिंदगी भर साथ का वादा किया था,
आँखों से उस दोस्त को बदलते देखा है।
       ।।मोहित।।

Friday, June 30, 2017

गुरु वन्दना

गरुदेव  मिलें  मुझे  तुम्हारा  सहारा
मेरा  साथ  बना   रहें  हमेशा  तुम्हारा।
गुरुज्ञान  से मेरा ज्ञान का दीप जलाना
इस दुनिया से हटा के चरणों में लगाना।
इस मोह माया की दुनिया से अब तार दो
संसार  से अपनी  चरणों में स्वीकार लो
इस सागर में भटक नही जाहूँ इधर उधर
जहाँ भी जाहूँ मिले मुझको  तुम्हारा दर।
इस महकते चमन का मुझको फूल बना दो
अपनी चरणों की धूल तो मुझ पर लगा दो।
में  सेवक  हूँ  तुम्हारी  चरणों  में आया
मेरा मन मंदिर का दिया तुमनें जलाया
तुम्हारे  बराबर  जग  नही  कोई   दूजा
तुम  ही  मेरी  वन्दना  और  मेरी  पूजा।

मोहित

Tuesday, June 27, 2017

सफलता पर

माता  पिता  ने  अपना   फ़र्ज  पूरा  किया ।
आपने  उनको  सफलता  का उपहार दिया।
ईश्वर  की  कृपा ,अपनी  मेहनत  लगन  से,
सफलता के कदम को अब आपने छू लिया।
मोहित जागेटिया

Sunday, June 25, 2017

प्रिय तुम भी अब आओ बारिश है

तुम  से  मेरी  एक  गुजारिश  है ।
तुम भी चलें आओ सिफारिश है ।
ये मौसम भी अब बदल गया है,
प्रिय तुम भी अब आओ बारिश है।
मोहित

हम अपनी जिंदगी तुम्हारे नाम करते है

बुराई  को  त्याग के आज अच्छा काम करते है ।
ज़ख्मो से  भरी  जिंदगी  को  सरे आम करते है ।
कही खों ना जायें  इस नादान दुनिया में हम अब,
हम  अपनी  जिंदगी  अब  तुम्हारे नाम करते है ।
मोहित

नही मुसलमान ,इंसान बने

जहाँ पर खुदा रहता वही पर मेरा भगवान है।

मेरे खुदा  के  घर  में नही हिन्दू ,मुसलमान है।

मेरी सारी खुशियों की दौलत तो ये ही पर है,

जहाँ पर नही नफ़रत वही पर सच्चा इंसान है।

मोहित

Wednesday, June 21, 2017

भारत की हार पर

जो जश्न हार का यहाँ मनाते है।
जश्न में यहाँ पटाखे जलाते है।
क्या कमी रह गई मेरे भारत में,
जो गीत पाकिस्तान का गाते है।
मोहित
जश्न मनाने का तुम्हें कोई अधिकार नही है।
खेल तो हार जीत का ये युद्ध में हार नही है।
तुम इस धरा पर रहतें हो यहाँ की खाते हो फिर,
कैसा भेद तुम्हारा इस मुल्क से प्यार नही है।
मोहित

Saturday, June 17, 2017

पिता पर

Happy father's day

पिता जीवन का अहसास है।
पिता  से  सब  कुछ  पास है।
पिता  मेरी  वन्दना  है
पिता   पर  ही   विश्वास  है ।
पिता मेरे नवकार है
पिता से ही परिवार है
इन से बड़ा नही कोई,
भगवान के अवतार है।
कभी  मेरी  मुस्कान है।
कभी  मेरा  सम्मान  है।
करू में कुछ अच्छा कभी
उसमे  पिता  की  शान है।
मोहित